नीता और मुकेश अंबानी ने क्रिकेटर और अब राज्यसभा सांसद सचिन तेंडुलकर और उनके परिवार के लिए रविवार को विधु विनोद चोपड़ा की आने वाली फिल्म फेरारी की सवारी का खास शो रखा था। इसके साथ ही बॉलीवुड और क्रिकेट की दुनिया में यह अफवाह भी जोरों पर है कि पिच, संसद के बाद अब सचिन बॉलीवुड में भी किस्मत आजमा सकते हैं। तो क्या सचिन बतौर सांसद सफल साबित हो पाएंगे और क्या उन्होंने सांसद बन कर गलती की?
बल्ला बोलता है, खुद खामोश रहते हैं
सचिन ज्यादा बोलते नहीं हैं। मैदान पर उनका बल्ला बोलता है, पर वह अपना मुंह बहुत कम खोलते हैं।किसी विवादित मसले पर तो और भी कम। मैच फिक्सिंग जैसे मुद्दे पर भी उन्होंने अब तक दो बार ही मुंह खोला है। एक बार दक्षिण अफ्रीका के न्यूज चैनल पर तो दूसरी बार, एक पत्रिका में।
मीडिया को देने वाले इंटरव्यू में सचिन सिर्फ उनके पीआर से अप्रूव प्रश्नों का ही जवाब देते हैं। सामाजिक जीवन में सक्रिय शख्स को हर बड़े मुद्दे पर खुल कर अपनी राय देनी चाहिए। जैसे आमिर खान, नर्मदा बचाओ आंदोलन से लेकर गुजरात दंगे जैसे मुद्दों पर खुल कर बोलते हैं। संसद में भी अगर सचिन की खामोशी जारी रही, तो फिर क्या फायदा?
कई कंपनियों के ब्रांड अंबेसडर
सचिन कई कंपनियों के ब्रांड अंबेसडर हैं। इनमें से कुछ कंपनियां विवादित भी हैं। जैसे कोका कोला। कोका कोला को लेकर देशभर आंदोलन होते रहते हैं। केरल से लेकर बनारस और जयपुर में कई आंदोलन अभी भी चल रहे हैं। ऐसे में राज्यसभा में जब ऐसी कंपनियों पर सवाल उठाए जाएंगे, तो सचिन की भूमिका संदेह से परे कैसे रह पाएगी, यह देखना होगा।
क्रिकेट या देश सेवा
सचिन की पहचान सिर्फ एक क्रिकेटर के तौर पर ही है। उन्होंने कह दिया है कि वह क्रिकेट खेलते रहेंगे। इसके अलावा वह विज्ञापन भी करते हैं और अब चर्चा फिल्मों में काम करने की भी है। ऐसे में संसद को कितना समय दे पाएंगे?
निजी हित बनाम जनहित
क्रिकेट से जुड़ी सचिन की हर उपलब्धि को देश से जोड़ कर देखा जाता रहा है, लेकिन वह कई बार निजी फायदे की बातें करते हुए भी पाए गए हैं। फेरारी कार पर टैक्स छूट मांगने का मामला हो या बिना नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लिए बंगले में प्रवेश का मामला हो, ऐसा कई बार लगा कि सचिन निजी हितों को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं।
लगेंगे दाग
राजनीति कोयले की खान की तरह होती है। यदि आप इसमें आएंगे तो कालिख लगनी तय है। आरोप लगेंगे और आपको सफाई भी देनी होगी। अभी तक सचिन कभी भी विवादों में नहीं फंसे हैं लेकिन राज्यसभा में नॉमिनेशन के दिन से ही उन पर कांग्रेस का करीबी होने का आरोप लगने लगा है।आगे भी सचिन की कमीज पर ऐसे कई दाग लगेंगे, जिसके लिए उन्हें तैयार रहना चाहिए।

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